ॐ जय शिव ओंकारा: शिव आरती का महत्व और पूर्ण पाठ
देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शिवशंकर, नीलकंठ… उनके अनेक नाम हैं और उनके भक्त भी अनगिनत। शिव जी की आराधना का विशेष महत्व है, और उनकी आरती का पाठ तो मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। आज हम बात करेंगे शिव जी की प्रसिद्ध आरती “ॐ जय शिव ओंकारा” के बारे में।
आरती का महत्व:
शिव आरती सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक अनुभव है। यह हमें भगवान शिव के करीब ले जाती है, हमारी आत्मा को शुद्ध करती है और हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। आरती का नियमित पाठ करने से मन शांत रहता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आरती का पूर्ण पाठ:
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। शिव पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ हर हर हर महादेव.॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। प्रभु दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखते। त्रिभुवन मन मोहे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी। शिव मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद चंदा, सोहे त्रिपुरारी॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। शिव बाघम्बर अंगे।
ब्रह्मादिक सनकादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता। शिव कर में त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। स्वामी जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे। प्रभु प्रेम सहित गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ हर हर हर महादेव॥